September 29, 2026
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श्रीमद भगवद गीता महोत्सव पर विशेष

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गीता महोत्सव हर वर्ष मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है

नैनीताल। सरोवर नगरी भगवद गीता महोत्सव हर
वर्ष मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाता है उसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जुन को भगवद गीता के उपदेश दिए थे तथा इस वर्ष यह आज 1 दिसंबर को सुनिश्चित है श्रीमद भगवद गीता ना केवल एक ग्रंथ है, बल्कि जीवन मार्गदर्शन भी है. इसके उपदेश वर्तमान में भी उतने ही दिव्य माने जाते हैं, जितने प्राचीन काल में थे.
भगवद गीता में 18 अध्याय हैं, जिनमें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर उपदेश समाहित है । ये अध्याय हैं: अर्जुन विषादयोग, सांख्ययोग, कर्मयोग, ज्ञान कर्म संन्यासयोग, कर्म संन्यासयोग, आत्मसंयमयोग, ज्ञान विज्ञानयोग, अक्षर ब्रह्मयोग, राजविद्या राजगुह्ययोग, विभूतियोग, विश्वरूप दर्शनयोग, भक्तियोग, क्षेत्र क्षेत्रज्ञ विभागयोग, गुणत्रय विभागयोग, पुरुषोत्तमयोग, दैवासुर समद्विभागयोग, श्रद्धात्रय विभागयोग और मोक्ष संन्यासयोग के नाम से जाने जाते है ।
श्रीमद भगवद गीता जीवन की चुनौतियों का सामना करने, आत्म-ज्ञान प्राप्त करने, सही और गलत के बीच अंतर समझने और निष्काम कर्म करने के लिए मार्गदर्शन करती है। यह एक आध्यात्मिक ग्रंथ है जो ज्ञान, भक्ति और कर्मयोग का संगम प्रस्तुत करता है, और यह व्यक्ति को नैतिक और आध्यात्मिक विकास के माध्यम से जीवन में संतुलन और शांति प्राप्त करने में मदद करता है।
भगवद गीता में कर्म-योग (बिना फल की चिंता किए अपना काम करना), आत्मा की अमरता (डर से मुक्ति), आत्म-नियंत्रण (क्रोध और मोह से बचना), स्वयं पर विश्वास (आत्मविश्वास और आत्म-ज्ञान), और धर्म का पालन (अपने नैतिक कर्तव्य को निभाना) शामिल किया गया हैं। इन उपदेशों का उद्देश्य व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों का सामना करने और चरित्र निर्माण में मदद करना है।
भगवद गीता में कहा गया है “कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।” है, जिसका अर्थ है कि मनुष्य का अधिकार केवल कर्म करने में है, उसके फल में नहीं। भगवद गीता कहती है “यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।”, जिसका अर्थ है कि जब भी धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब ईश्वर स्वयं अवतार लेते हैं।
भगवद गीता में उल्लिखित है
“नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि नैनं दहति पावकः।” – इस श्लोक का अर्थ है कि आत्मा को न तो शस्त्र काट सकते हैं और न ही आग जला सकती है। भगवद गीता कहती है कि
“परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।” – इसका अर्थ है कि सज्जनों की रक्षा के लिए और दुष्टों के विनाश के लिए और धर्म की स्थापना के लिए मैं युगों-युगों में अवतरित होता हूँ।
यूनेस्को ने विश्व धरोहर दिवस के अवसर पर भगवद गीता की पांडुलिपियों को ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर’ में शामिल किया है,
दिल्ली के इस्कॉन मंदिर में ‘अद्भुत भगवद् गीता’ दुनिया की सबसे बड़ी छपी हुई पवित्र पुस्तक के रूप में पहचानी जाती है, ,283 से अधिक विद्वानों ने श्रीमद्भगवद गीता का विभिन्न भाषाओं में अनुवाद किया है, आपको भगवद गीता महोत्सव की बहुत शुभकामनाएं।

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