राजेन्द्र निगम “राज” की पुस्तक कविताओं का बै नी आ ह पी ना ला” का
न्यू जर्सी अमेरिका में हुआ तृतीय लोकार्पण


गुरुग्राम नैनीताल। साहित्य एवम समाज को समर्पित “कृष्णादित्य परम्परा परिवार” (उन्नाव)/गुरुग्राम के संस्थापक राजेन्द्र निगम “राज” की तीसरी पुस्तक “कविताओं का बै नी आ ह पी ना ला” का तीसरा लोकार्पण तथा आमन्त्रित मित्रों, साहित्यकारों एवं शुभचिंतकों का “सम्मान समारोह” वेस्ट विंडसर, न्यू जर्सी, अमेरिका में आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध समाजसेवी,गायक व डेंटल सर्जन डॉ सतीश मलिक ने की है। बता दे लोकार्पण समारोह में डॉ सतीश मलिक, घनश्याम गुप्ता, रजनी भार्गव, अश्विनी व अणिमा जौहरी, श्री मनोज व नन्दिनी रॉय, कु आहाना, शोभित, राखी वैश, योगिता मोदी, सुशील, वीणा सिन्हा, सरिता नेमाणी, वसुधा, मधु जुनेजा, सचिन, ज्योति भंगाले, अपर्णा, वैभव, भाषा कपूर, आद्या, आदिता आदि की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ाई। पुस्तक के रचयिता राजेन्द्र निगम “राज” ने बताया कि पुस्तक का शीर्षक “कविताओं का बैनीआहपीनाला” (अर्थात vibgyor) इंद्रधनुष के 7 रंगों के हिन्दी संक्षिप्त नाम के अनुरूप रखा गया है।
बै नी आ ह पी ना ला अर्थात बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल। इंद्रधनुष के 7 रंगों को ध्यान में रखते हुए इसमें काव्य की सात विधाओं को सम्मिलित किया गया है। काव्य की सातों विधाएं भी 7 के गुणक में हैं जैसे – छंद..7, दोहे..14, हाइकु..21, गज़लें..28, गीत..35, माहिए..42, मुक्तक..49, पुस्तक में शुभकामनायें भी 7 विशिष्ट व्यक्तियों/साहित्यकारों द्वारा प्रदान की गई हैं। उन्होंने ये भी बताया कि इस पुस्तक का लोकार्पण भी हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु 7 बार, अलग अलग स्थानों पर किया जाएगा। पुस्तक का प्रथम लोकार्पण समारोह गुरुग्राम, भारत में किया गया था। द्वितीय लोकार्पण सिएटल क्षेत्र, अमेरिका में आयोजित किया गया। इसी क्रम में ये तीसरा लोकार्पण न्यू जर्सी, अमेरिका में किया गया। पुस्तक का चतुर्थ लोकार्पण विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
समारोह के प्रारम्भ में सभी अतिथियों द्वारा माँ वाणी के चरणों में पुष्प अर्पित करके पूजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ श्रीमती अणिमा जौहरी द्वारा मधुर स्वर में प्रस्तुत माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। तत्पश्चात् सभी उपस्थित साहित्यकारों को अंगवस्त्र द्वारा सम्मानित किया गया। समारोह का आयोजन परम्परा परिवार की संयोजिका इन्दु “राज” निगम व तथा उन के पुत्र, पुत्रवधु एवं पौत्र अनिमेष, प्रेरणा एवं हृधान द्वारा किया गया। कार्यक्रम का मनोरंजक एवम सरस संचालन भी इन्दु “राज” निगम द्वारा किया गया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री सतीश मलिक ने अपने उद्बोधन में कहा कि सात विधाओं को अपने आप में समेटे राजेन्द्र निगम “राज” की ये पुस्तक काव्य जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि “परम्परा” परिवार द्वारा विदेश में भी इस तरह साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन करके, हिन्दी एवम् कविता की अलख जगाना वास्तव में बड़ा ही सराहनीय कार्य है।
अन्त में सभी उपस्थित साहित्यकारों एवं मित्रों का आभार अनिमेष व प्रेरणा द्वारा व्यक्त किया गया। “परम्परा” परिवार सभी मित्रों, साहित्यकारों एवं शुभचिंतकों का आभारी है।




















