राजेन्द्र निगम “राज” की तीसरी पुस्तक कविताओं का बै नी आ ह पी ना ला” का
अमेरिका में जनरल द्वारा भव्य लोकार्पण


नैनीताल गुरुग्राम। साहित्य एवम समाज को समर्पित “कृष्णादित्य परम्परा परिवार” (उन्नाव)/गुरुग्राम के संस्थापक राजेन्द्र निगम “राज” की तीसरी पुस्तक “कविताओं का बै नी आ ह पी ना ला” का द्वित्तीय लोकार्पण तथा आमन्त्रित मित्रों, साहित्यकारों एवं शुभचिंतकों का “सम्मान समारोह” धूम धाम पूर्वक किंग्सगेट लाइब्रेरी, कर्कलैंड, वाशिंग्टन, अमेरिका में मनाया गया। इसकी मुख्य विशेषता ये रही कि पुस्तक का लोकार्पण, मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम की गरिमा बढ़ा रहे, सिएटल स्थित भारत के महा वाणिज्य दूत (Consul General of India) प्रकाश गुप्ता जी के कर कमलों द्वारा किया गया।
लोकार्पण समारोह में सिएटल, फेडरल वे, मर्सर आइलैंड, वुडिनविल, रेडमंड और बेलव्यू आदि स्थानों से सुभाष शर्मा, शकुन शर्मा, प्राण वाही, सन्तोष वाही, अनु अरोड़ा, प्रदीप अरोड़ा, विनीता श्रीवास्तव, सीमा जैन, अभय जैन, श्वेता श्रीवास्तव, अतुल श्रीवास्तव, संगीता, मनीष गुप्ता, छंदा गुप्ता, विनायक कर्नाटकी, नेहा, गरिमा, प्रशांत, ईशाना, अनाएशा, रश्मि, ज्ञान, अमाया, आद्विक, ऋषभ सूद, वाणी ऋषि, शांतनु, आरना, अरुण, काव्या, आयरा, आशिरा, अमायरा, नोएडा, भारत से पधारे साहित्यकार रवि ऋषि तथा रेणु शर्मा, पुणे से पधारे राकेश कुमार गुप्ता और ओमी गुप्ता की गरिमामयी उपस्थिति ने समारोह की शोभा बढ़ाई।
पुस्तक के रचयिता राजेन्द्र निगम “राज” ने बताया कि पुस्तक का शीर्षक “कविताओं का बैनीआहपीनाला” (अर्थात vibgyor) इंद्रधनुष के 7 रंगों के हिन्दी संक्षिप्त नाम के अनुरूप रखा गया है।
बै नी आ ह पी ना ला अर्थात बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी और लाल। इंद्रधनुष के 7 रंगों को ध्यान में रखते हुए इसमें काव्य की सात विधाओं को सम्मिलित किया गया है। काव्य की सातों विधाएं भी 7 के गुणक में हैं जैसे – छंद..7, दोहे..14, हाइकु..21, गज़लें..28, गीत..35, माहिए..42, मुक्तक..49। पुस्तक में शुभकामनायें भी 7 विशिष्ट व्यक्तियों/साहित्यकारों द्वारा प्रदान की गई हैं। उन्होंने ये भी बताया कि इस पुस्तक का लोकार्पण भी हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु 7 बार, अलग अलग स्थानों पर किया जाएगा। पुस्तक का प्रथम लोकार्पण समारोह गुरुग्राम, भारत में किया गया था। इसी क्रम में ये द्वितीय लोकार्पण सिएटल क्षेत्र, अमेरिका में आयोजित किया गया। तीसरा लोकार्पण न्यू जर्सी, अमेरिका में किया जाएगा।
समारोह के प्रारम्भ में सभी अतिथियों द्वारा माँ वाणी के चरणों में पुष्प अर्पित करके पूजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कुमारी आशिरा एवम कुमारी अमायरा द्वारा मधुर स्वर में प्रस्तुत माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। तत्पश्चात् सभी उपस्थित साहित्यकारों को अंगवस्त्र द्वारा सम्मानित किया गया। समारोह का आयोजन परम्परा परिवार की संयोजिका इन्दु “राज” निगम व तथा उनकी पुत्री व दामाद मुदिता एवम आशीष द्वारा किया गया। कार्यक्रम का अद्भुत, मनोरंजक एवम सरस संचालन भी आशीष एवम मुदिता द्वारा किया गया।
मुख्य अतिथि महा वाणिज्य दूत प्रकाश गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि सात विधाओं को अपने आप में समेटे राजेन्द्र निगम राज की ये पुस्तक काव्य जगत में अपनी एक अलग पहचान बनाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि “परम्परा” परिवार द्वारा विदेश में भी इस तरह साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन करके, हिन्दी एवम् कविता की अलख जगाना वास्तव में बड़ा ही सराहनीय कार्य है। इसके साथ ही उन्होंने कंस्यूलेट द्वारा भारत की कला एवम संस्कृति के प्रचार प्रसार हेतु किए जा रहे कार्य कलापों का भी वर्णन किया।




















