पटवाडांगर क्षेत्र की बहुमूल्य सरकारी भूमि की बंदरबाट के विरोध में
कांग्रेसियों का पटवाडांगर में धरना प्रदर्शन आज क्या कहा प्रदेश महामंत्री डॉ गणेश उपाध्याय ने
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नैनीताल। उत्तराखंड के नैनीताल जनपद के पटवाडांगर क्षेत्र की बहुमूल्य सरकारी भूमि की बंदरबाट को 90 वर्षों की दीर्घकालीन लीज पर देने की प्रस्तावित योजना को लेकर जनहित में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
डॉ. गणेश उपाध्याय, महामंत्री उत्तराखंड कांग्रेस, पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल एवं जिला नैनीताल कांग्रेस कमेटी के प्रभारी ने कहा कि पटवाडांगर की जमीन केवल सरकारी संपत्ति नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड की प्राकृतिक धरोहर और आने वाली पीढ़ियों की अमानत है।
उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर इतनी लंबी अवधि के लिए सरकारी जमीन निजी निवेश के लिए देने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है? यदि पर्यटन और निवेश को बढ़ावा देना ही उद्देश्य है तो सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इससे स्थानीय जनता, युवाओं, किसानों और क्षेत्र के छोटे व्यापारियों को क्या लाभ मिलेगा।
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि कांग्रेस विकास और निवेश के विरोध में नहीं है, लेकिन विकास के नाम पर सार्वजनिक संपत्तियों के उपयोग में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि होना चाहिए। 90 वर्षों की लीज कोई सामान्य प्रशासनिक निर्णय नहीं है। इसका प्रभाव कई पीढ़ियों तक रहेगा। इसलिए इस पर व्यापक जनचर्चा और सार्वजनिक जवाबदेही जरूरी है।
उन्होंने सरकार से निम्नलिखित सवालों का जवाब मांगा:
- पटवाडांगर में कुल कितनी सरकारी भूमि पर्यटन परियोजना के लिए प्रस्तावित है?
- इस भूमि को 90 वर्षों की लीज पर देने का निर्णय किस स्तर पर लिया जा रहा है ?
- जमीन किस कंपनी, उद्योगपति अथवा निवेशक को देने का प्रस्ताव है?
- जमीन का सरकारी मूल्यांकन और बाजार मूल्य कितना है?
- प्रस्तावित वार्षिक लीज किराया कितना होगा और उसमें कितने वर्षों बाद वृद्धि होगी?
- क्या स्थानीय ग्राम सभाओं और नागरिकों की राय ली गई है?
- क्या पर्यावरणीय प्रभाव का वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया है?
- इस परियोजना में स्थानीय युवाओं के लिए कितने रोजगार सुनिश्चित किए जाएंगे?
- क्या लीज समाप्त होने पर जमीन और उस पर निर्मित परिसंपत्तियां सरकार को वापस मिलेंगी?
- पूर्व में जारी प्रीमियम हॉस्पिटैलिटी परियोजना का टेंडर निरस्त क्यों किया गया और आगे की कार्ययोजना क्या है?
डॉ. उपाध्याय ने कहा कि नैनीताल और उसके आसपास के क्षेत्र पहले ही बढ़ते पर्यावरणीय दबाव, यातायात, जल संकट और अनियोजित निर्माण जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं। ऐसे में किसी भी बड़ी पर्यटन परियोजना को मंजूरी देने से पहले पर्यावरणीय क्षमता, जल उपलब्धता, सीवेज प्रबंधन और स्थानीय पारिस्थितिकी का स्वतंत्र अध्ययन आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता ने राज्य निर्माण के लिए लंबा संघर्ष किया था। उस आंदोलन के पीछे जल, जंगल, जमीन पर स्थानीय लोगों के अधिकार, रोजगार और सम्मानजनक विकास की भावना थी। आज सरकार की जिम्मेदारी है कि इन मूल भावनाओं को ध्यान में रखकर निर्णय ले।
डॉ. गणेश उपाध्याय ने मांग की पटवाडांगर भूमि प्रकरण से संबंधित सभी सरकारी प्रस्ताव, निवेशक का विवरण, भूमि मूल्यांकन, टेंडर दस्तावेज, लीज की शर्तें और पर्यावरणीय रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएं। जब तक पूरी पारदर्शिता और जनहित की गारंटी नहीं होती, तब तक इतनी लंबी अवधि की लीज पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि जिला नैनीताल कांग्रेस कमेटी के प्रभारी के रूप में वे इस विषय को जनहित के मुद्दे के तौर नेता प्रतिपक्ष उत्तराखंड आदरणीय यशपाल आर्य जी,सी डब्ल्यू सी मेंबर अखिल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस गुरदीप सिंह सप्पल के नेतृत्व में 4 नवंबर को प्रातः 10:00 बजे से पटवाडागर में वहां के समस्त लोगों व जिला ,ब्लाक, शहर कांग्रेसजनो के साथ लेकर विशाल धरना कार्यक्रम रखा गया है। स्थानीय जनता, जनप्रतिनिधियों तथा सामाजिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श कर तथ्यात्मक जानकारी जनता के सामने रखेंगे।
हमारा सवाल स्पष्ट है—उत्तराखंड की जमीन पर विकास होना चाहिए, लेकिन उस विकास में उत्तराखंड के लोगों का अधिकार, रोजगार, पर्यावरण और भविष्य सबसे पहले सुरक्षित होना चाहिए ।
“उत्तराखंड की जमीन कोई सरकार की निजी संपत्ति नहीं है, यह प्रदेश की जनता की धरोहर है। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन जमीन आने वाली पीढ़ियों की
अमानत होती है।”

























