कुमाऊँ विश्वविद्यालय के संगीत विभाग में तबला एकल वादन एवं लयकारी पर विशेष व्याख्यान-प्रदर्शन आयोजित
भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध ताल परंपरा और लयकारी की बारीकियों से विद्यार्थियों एवं संगीतप्रेमियों को किया



नैनीताल। सरोवर नगरी में कुमाऊँ विश्वविद्यालय के डीएसबी परिसर स्थित संगीत विभाग में सोमवार को ‘एकल तबला वादन में लय एवं लयकारी का प्रयोग’ विषय पर विशेष व्याख्यान-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में राजस्थान संगीत संस्थान, जयपुर के सहायक प्राध्यापक एवं आकाशवाणी के ‘ए’ ग्रेड कलाकार डॉ. पवन सेम ने तबला एकल वादन की मनमोहक प्रस्तुति के साथ भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध ताल परंपरा और लयकारी की बारीकियों से विद्यार्थियों एवं संगीतप्रेमियों को परिचित कराया।
कार्यक्रम का शुभारंभ डीन एजुकेशन तथा निदेशक विजिटिंग प्रोफेसर प्रो. ललित तिवारी, आमंत्रित कलाकार डॉ. पवन सेम , संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. रवि जोशी ,डीन प्रॉफ एल एस लोधियाल ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
इंदौर के प्रतिष्ठित तबला गुरु पंडित विलास खरगोनकर के शिष्य डॉ. पवन सेम ने अपनी प्रस्तुति में दिल्ली, अजराड़ा एवं पंजाब घरानों की विशिष्ट वादन शैलियों का प्रदर्शन किया। उन्होंने विभिन्न तालों में लय एवं लयकारी के प्रयोगों, वादन की तकनीकी विशेषताओं तथा घराना परंपराओं की कलात्मक अभिव्यक्ति को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। उनके व्याख्यान-प्रदर्शन से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को तबला वादन के सैद्धांतिक ज्ञान के साथ उसके व्यावहारिक पक्षों को समझने का अवसर मिला।
इस अवसर पर संगीत विभागाध्यक्ष डॉ. रवि जोशी ने कहा कि भारतीय शास्त्रीय संगीत एवं ललित कलाएँ हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं। इन परंपराओं का संरक्षण, संवर्धन एवं प्रचार-प्रसार करने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संगीत की विविध घराना परंपराओं में निहित ज्ञान और कलात्मक विशिष्टताओं को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. जोशी ने कहा कि संगीत विभाग की प्राथमिकता विद्यार्थियों एवं युवाओं में भारतीय शास्त्रीय संगीत और अन्य ललित कलाओं के प्रति अभिरुचि विकसित करना है। इसी उद्देश्य से विभाग भविष्य में भी व्याख्यान-प्रदर्शन, सांगीतिक गोष्ठियों एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों का निरंतर आयोजन करेगा, जिससे युवा पीढ़ी में अपनी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति रुचि, जागरूकता एवं सम्मान की भावना और अधिक सुदृढ़ हो सके।
कार्यक्रम में प्रो. ललित तिवारी, प्रो. एल.एस. लोधियाल, प्रो. लज्जा भट्ट, प्रो. अनिल बिष्ट, प्रो. जिबू साहू, डॉ. कपिल खुल्बे, डॉ. कुबेर गिनती, डॉ. दीपक मेलकानी, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. गगनदीप होठी, डॉ. पूजा जोशी, डॉ. पंकज भट्ट, डॉ. अलंकार महतोलिया, डॉ. संध्या यादव, डॉ. लक्ष्मी धस्माना एवं श्रीमती बबीता लोहनी सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं संगीतप्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन संगीत विभाग की शोध छात्रा कोमल पाठक ने किया। आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भारतीय शास्त्रीय संगीत की विभिन्न घराना परंपराओं, तबला वादन की तकनीकों तथा लयकारी के कलात्मक एवं व्यावहारिक पक्षों को निकट से जानने और समझने का अवसर प्राप्त हुआ।

























