“मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सु दशरथ अजिर बिहारी”
श्री राम की महिमा अपरम्पार और अनंत है प्रोफेसर: ललित तिवारी

नैनीताल। सरोवर नगरी मंगल भवन अमंगल हारी, द्रवहु सु दशरथ अजिर बिहारी।”
विपदाओं को हरने वाला ,आत्म बल बढ़ाने वाला राम का नाम ही सत्य है । भारतीय संस्कृति के परिचायक श्री राम की महिमा अपरम्पार और अनंत है। श्री राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और उनकी महिमा का गुण
गान वेद, पुराण, उपनिषद में मिलता है ।
श्री राम आदर्शों, धर्म, सत्य, और वचनानुसार जीवन जीने की सर्वोच्च प्रतिमूर्ति हैं वो
कल्पवृक्ष के समान है, जो मनो कामना पूर्ण एवं संकटों का नाश करता है।
राम नाम का जाप शोक और बंधनों से मुक्त हो जाता हैतथा
कृपा और अभयदान प्रदान करते हैं। श्री राम का नाम सभी प्रकार के मंगलों (सुखों और कल्याण) का मूल है इसीलिए कहा गया है कि
राम से बड़ा राम का नाम शास्त्रों के अनुसार, सगुण रूप श्रीराम से भी बड़ा उनका नाम माना गया है, क्योंकि नाम के स्मरण मात्र से पापी से पापी व्यक्ति का उद्धार हो जाता है।
राम नाम का सच्चा स्मरण जन्म-जन्मांतर के संचित पापों को काट देता है और भवसागर से पार लगाता है। प्रभु राम की कृपा से अहिल्या जैसी शिला (पत्थर) का उद्धार हुआ और शरण में आने वाले तीनों लोकों के जीव आश्रय पाते हैं
“राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने॥”
प्रभु श्री राम के बचपन का नाम राघव है। नामकरण संस्कार के समय गुरु वशिष्ठ जी ने उनका नाम राम रखा। उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम भी कहते हैं और रामचंद्र भी उनका नाम है। वैसे तो श्री राम के 108 नाम है किंतु उनके प्रमुख नाम जो
सब में रमते हैं और आनंद और शांति देते है
राम: जो सबके मन में रमते हैं । रामचंद्र: चंद्रमा के समान शीतल, शांत और सुंदर मुख वाले , राघव: रघुवंश में उत्पन्न श्रेष्ठ पुरुष , रघुनंदन / रघुवीर: रघुवंश के लाडले और वीर योद्धा ,सीतापति जानकीवल्लभ: माता सीता के स्वामी और प्रिय , मर्यादा पुरुषोत्तम: उत्तम आदर्श और मर्यादा का पालन करने वाले श्रेष्ठ पुरुष,दशरथ नंदन: राजा दशरथ के प्यारे पुत्र।
कोशलेंद्र: कोशल देश (अयोध्या) के राजा ,
, रामभद्र: कल्याणकारी और शुभ स्वभाव वाले।
श्री राम केवल एक ऐतिहासिक , पौराणिक पात्र के साथ मर्यादा, धर्म, सत्य और आदर्श जीवन के साथ भारतीयता की ध्वज हैं।
रमंति इति रामः संपूर्ण ब्रह्मांड में, हर जीव के रोम-रोम में रमण और संपूर्ण सृष्टि विश्राम करती है, वह ‘राम’ हैं।
राम एक शाश्वत ऊर्जा और चेतना का नाम है।
श्री राम नैतिकता, अनुशासन और सामाजिक नियमों (मर्यादा पुरूषोत्तम , कर्तव्यपरायणता ,धर्म और सत्य का संगम ,
कठिनाइयों, अन्याय और संकटो में सत्य, क्षमा, पराक्रम और धर्म के अनुरक्षण करने वाले ,समरसता और करुणा सच्चा नेतृत्व और मानवता सबका आदर करने वाले कोमल चरित्र में दृढ़ता और कृतज्ञता की पालक
. अद्वैत और भक्ति का स्वरूप, राम निर्गुण और सगुण ब्रह्म हैं—”सियाराम मय सब जग जानी” अर्थात् इस पूरे जगत में कण-कण में सीता और राम है इसीलिए नमस्कार ओर अभिवादन में राम राम ,जय सिया राम प्रचलित है । वाल्मीकि रामायण ,रामायण रामचरितमानस श्री राम को समर्पित ग्रन्थ है ।

























