November 4, 2026
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हाई कोर्ट हल्द्वानी शिफ्टिंग का विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने कहा कानूनी लड़ाई है जारी 

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नैनीताल ।  नैनीताल से उत्तराखंड हाईकोर्ट हल्द्वानी शिफ्टिंग का विरोध कर रहे अधिवक्ताओं ने कहा कि इस मुद्दे पर कानूनी लड़ाई जारी है । उनकी ओर से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की गई है साथ ही हाईकोर्ट शिफ्टिंग के प्रस्ताव के खिलाफ कानून मंत्री,प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को ज्ञापन दिए जाएंगे ।

  बुधवार को हाईकोर्ट परिसर के समीप एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में अधिवक्ता एम सी पन्त ने कहा कि 12 अगस्त 2026 को राज्य सरकार ने बेलबाबा हल्द्वानी स्थित वन भूमि को हाईकोर्ट को हस्तांतरित करने की स्वीकृति प्रदान की । जबकि वन संरक्षण अधिनियम के अनुसार राज्य सरकार केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति के बिना यह निर्णय नहीं ले सकती है । इसके अलावा राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में कहा कि बेलबाबा के आसपास हाथी कॉरिडोर नहीं है । जबकि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कई निर्देशों के साथ नए सिरे से हाथी कॉरिडोर चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। 

 अधिवक्ता कार्तिकेय हरि गुप्ता ने कहा कि नैनीताल के जिलाधिकारी की ओर से बेलबाबा हलद्वानी की वन भूमि को हाईकोर्ट को हस्तांतरित करने के संदर्भ में मई 2026 में राज्य सरकार को दिया गया प्रस्ताव गैर कानूनी है । जो अपराध की श्रेणी में है । बताया कि इस सम्बंध में हाईकोर्ट के अधिवक्ता कौशल साह जगाती ने एक प्रत्यावेदन  केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंतालय को भेजा था । इस सम्बंध में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 3 सितम्बर 2026 को, प्रमुख सचिव वन एवं पर्यावरण,उत्तराखंड सरकार से कानून के प्रावधानों के मुताबिक कार्यवाई करने को कहा गया है। 

 हाईकोर्ट शिफ्टिंग के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके अधिवक्ता रमन शाह ने कहा कि उनकी याचिका हाईकोर्ट से खारिज हुई है लेकिन उनकी याचिका खारिज होने से यह मामला अब न्यायिक प्रक्रियाधीन हो गया है और सुप्रीम कोर्ट जाने का रास्ता खुल गया । कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 15 जुलाई के आदेश के खिलाफ रिव्यू याचिका विचाराधीन है और अब हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट जाएंगे । क्योंकि हाईकोर्ट में वन संरक्षण अधिनियम सहित कुछ अन्य तथ्यों की हाईकोर्ट के आदेश में महत्व नहीं मिला है ।

   वरिष्ठ अधिवक्ता व पूर्व सांसद डॉ. महेंद्र पाल ने राज्य सरकार द्वारा उत्तराखंड हाईकोर्ट शिफ्टिंग को जारी 12 अगस्त के आदेश की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि इस आदेश में कहा गया है कि नैनीताल से हाईकोर्ट शिफ्ट होने के बाद नैनीताल हाईकोर्ट बिल्डिंग व परिसर का  “मॉनिटाइज” किया जाएगा । यानी सरकार इसे निजी हाथों में बेचना चाह रही है। जिससे साफ है कि सरकार व्यापारी के रूप में काम कर रही है । इसी तरह से कई सार्वजनिक सम्पतियां पहले भी बेची जा चुकी है । सरकार, हाईकोर्ट के नाम पर हलद्वानी में भी प्रोपर्टी डीलरों को भूमि की खरीद फरोख्त में फायदा पहुंचा रही है । अधिवक्ता व हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष दुर्गा सिंह मेहता, नवनीश नेगी व भुवनेश जोशी ने पहाड़ से हाईकोर्ट शिफ्टिंग को उत्तराखंड राज्य की मूल अवधारणा के खिलाफ बताया । पत्रकार वार्ता में कमलेश तिवारी, श्री बर्थवाल, कैलाश तिवारी,किशोर जोशी,विक्रम राठौर,अमनजोत चड्डा, सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद थे ।

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