November 6, 2026
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कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी

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ने हैदराबाद स्थित प्रसिद्ध वी एन आर वी जे एन आई टी कॉलेज में

“पर्यावरण एवं जैव विविधता” विषय पर विशेष आमंत्रित दिया व्याख्यान

नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने हैदराबाद स्थित प्रसिद्ध वी एन आर वी जे एन आई टी कॉलेज में “पर्यावरण एवं जैव विविधता” विषय पर विशेष आमंत्रित व्याख्यान दिया। इस दौरान प्रो. तिवारी ने कहा कि हम सभी प्राणी जैव विविधता का हिस्सा हैं। हमारा अजैविक घटकों से संबंध ही पर्यावरण है। जलवायु परिवर्तन आज जैव विविधता के लिए सबसे बड़ा खतरा है। जैव विविधता केवल विभिन्नता नहीं, बल्कि यह हमारी जीवन-निर्भरता का आधार है। विश्व में प्रतिदिन लगभग 40 हजार पौधों और जंतुओं की प्रजातियों का उपयोग किया जाता है।

उन्होंने बताया कि जैव विविधता तीन प्रकार की होती है – आनुवंशिक, प्रजातीय और पारिस्थितिकीय, जो अल्फा, बीटा और गामा विविधता बनाती हैं। आज की चुनौती पर्यावरण का सतत उपयोग, समान भागीदारी और संरक्षण है।

प्रो. तिवारी ने कहा कि जैव विविधता परागण, मृदा निर्माण, पोषक चक्र और विश्व की 11 प्रतिशत अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। आक्रामक प्रजातियां, आवास नष्ट होना, अत्यधिक दोहन और प्रदूषण से लगभग 48,600 प्रजातियां दुर्लभ हो रही हैं।

उन्होंने उत्तराखंड के संदर्भ में जलवायु, जल विज्ञान और पारिस्थितिकी तंत्र के संबंध बताए। साथ ही वन अधिनियम 1980, जैव विविधता अधिनियम 2002, वन्यजीव अधिनियम 1972, IUCN, CITES जैसी संस्थाओं के संरक्षण प्रयासों पर चर्चा की। प्रॉफ ललित तिवारी ने कहा कि जैव विविधता ही जीवन है तथा प्रकृति से सामंजस्य ही सतत विकास है इसलिए प्रकृति से जुड़ो भविष्य बचाओ । हम प्रकृति का हिस्सा है इसलिए जन्मदिन पर एक वृक्ष का पौधा अवश्य लगाए ।
कार्यक्रम में प्रो. तिवारी को अंगवस्त्र और पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्रो. बेबी, प्रो. रमेश कुमार, डॉ. अहमद सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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