नैनीताल की बेटी डॉ. ज़ैनब खान ने विकसित किया हज़वाच मोबाइल ऐप
ये एप आम जन को आवश्यक आपदा एवं मौसम संबंधी सूचना उपलब्ध कराएगी


नैनीताल की बेटी एवं भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई आई टी) रुड़की पूर्व पोस्ट-डॉक्टोरल फेलो डॉ. ज़ैनब खान ने हज़वाच नामक एक नागरिक-सहभागिता ( सिटीजन – पावरएड ) आधारित मोबाइल ऐप विकसित की है जो भारत के दूरस्थ क्षेत्रों विशेषकर हिमालयी गाँवों के भूस्खलन, बाढ़, मलबा प्रवाह (देम्ब्रीश फ्लो ), वनाग्नि तथा अन्य प्राकृतिक आपदाओं की घटनाओं की रिपोर्टिंग और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण के उद्देश्य से तैयार की गई है। साथ ही ये आम जन को भी आवश्यक आपदा एवं मौसम संबंधी सूचना उपलब्ध कराती है।
हज़वाच के माध्यम से कोई भी नागरिक अपने क्षेत्र में घटित प्राकृतिक आपदाओं की जानकारी, घटना का स्थान तथा प्रामाणिक फोटो अपलोड कर सकता है। नागरिकों द्वारा साझा किया गया यह डेटा अन्य यूज़र्स के साथ भविष्य में वैज्ञानिक अनुसंधान, जोखिम आकलन तथा आपदा प्रबंधन के लिए एक विश्वसनीय डेटाबेस तैयार करने में सहायक होगा। इसमें बेटा टेस्टर एवं सलाहकार के तौर पर क्रमशः अमित कुमार शोधार्थी, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय एवं डॉ दीपिक वशिष्ठ सहायक प्रोफेसर, डॉ. हरिसिंह गौर विश्विद्यालय, सागर ने भी अपना योगदान दिया है।
डॉ. ज़ैनब खान पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड, विशेषकर नैनीताल एवं कुमाऊँ क्षेत्र, में जलवायु परिवर्तन, भूस्खलन, झीलों के पारिस्थितिकी तंत्र तथा प्राकृतिक आपदाओं पर निरंतर शोध कर रही हैं। उनके अनेक शोधपत्र राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं तथा टाइम्स ऑफ़ इंडिया देहरादून में भी शामिल किये गए हैं। अपनी पी. एच.डी. में उन्होंने जलवायु परिवर्तन का कुमाऊँ की झीलों के पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव का अध्ययन किया, जबकि वर्ष 2023 में प्राप्त भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान संस्थान की पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप के अंतर्गत उन्होंने नैनीताल क्षेत्र में भूस्खलन पर विस्तृत शोध किया। उनके शोध कार्य का उद्देश्य उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन, पारिस्थितिकी तंत्र एवं आपदा जोखिम को बेहतर ढंग से समझना तथा वैज्ञानिक समाधान विकसित करना रहा है।
डॉ. खान का जन्म और प्रारंभिक शिक्षा नैनीताल से जुड़ी रही है। उन्होंने इंटरमीडिएट तक की शिक्षा मोहन लाल साह बालिका विद्या मंदिर, नैनीताल से प्राप्त की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक तथा जामिया मिल्लिया इस्लामिया से भूगोल में स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। उनकी माता आसिफ़ा परवीन भी लंबे समय तक नैनीताल में शिक्षिका के पद सेवारत रहीं हैं तथा शिक्षा मंत्री मतबर सिंह खंडारी से विद्यालय के उत्तम रखरखाव के लिए सम्मानित हो चुकी हैं।




















