भवाली युवा महोत्सव को पुलिस की नहीं मिली मंजूरी
पुलिस ने कहा अगर आपने कार्यक्रम करवाया तो होगा मुकदमा दर्ज
आयोजको मैं मायूसी पुलिस पर उठाए सवाल मांगा लिखित जवाब परमिशन न देने का


भवाली नैनीताल।आज हम आपके सामने एक बहुत ही दुखद और चिंताजनक मामला रखना चाहते हैं जिसमें केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि स्थानीय बच्चों‑युवाओं के सपनों, उम्मीदों और आत्मसम्मान का भी सवाल है। हमारा यह भवाली युवा महोत्सव कई महीनों से चल रहा था बच्चे नियमित रूप से नृत्य, गाने, भाषण और अन्य प्रतियोगिताओं की तैयारी कर रहे थे। इस कार्यक्रम में न सिर्फ भवाली, बल्कि रामगढ़, भीमताल और नैनीताल के स्कूलों के बच्चों की भी भागीदारी थी। लेकिन अब तक प्रशासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त नहीं हो पाई। इसके बावजूद भी हमने बार‑बार लेटर भेजे, संपर्क किया, टीम खुद जाकर मिली, फिर भी या तो उत्तर नहीं दिया गया या फिर अनावश्यक देरी और टाल मटोल की जा रही है। अब जहाँ तक पुलिस की बात है तो उनकी जो कार्यवाही हुई है, वह पूरी तरह पक्षपातपूर्ण और दबाव‑आधारित लग रही है। हमसे कह दिया गया हैं कि “अगर आपने कार्यक्रम करवाया तो मुकदमा दर्ज किया जाएगा”।
साथियों, यह सवाल खुलकर पूछना होगा आखिर किसके दबाव में पुलिस इस तरह की कार्यवाही कर रही है? किसके इशारे पर स्थानीय बच्चों की मेहनत, उनकी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति और उनके मंच को रोका जा रहा है? क्या यही वह न्याय और लोकतंत्र है, जिसकी हमें गारंटी दी जाती है?
इसी दबाव और अनिश्चितता के चलते अब हमें कल के प्रोग्राम को आधिकारिक तौर पर रद्द करना पड़ रहा है। बच्चों, यह कार्यक्रम रद्द होना तुम्हारी गलती नहीं है, तुम्हारी तैयारी नहीं बल्कि उस प्रशासनिक लापरवाही और दबाव‑राजनीति का नतीजा है, जिसने तुम्हारे लिए एक छोटा सा मंच भी उपलब्ध नहीं करवाया इसके लिए ज़िम्मेदार नैनीताल पुलिस और पीछे से वार कर रहे कुछ लोकल गीदड़ हैं, तुम्हारी मेहनत- तुम्हारी आवाज़, तुम्हारी संस्कृति मूल्यवान हैं अगर आज इसे रोक भी दिया जाता है, तो कल यही आवाज़ और ज़्यादा तेज़ होकर उठेगी।
अंत में हम प्रशासन से यह सवाल खुलकर पूछते हैं 1- किस आधार पर एक शांतिपूर्वक, बच्चों‑युवाओं पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम रोका जा रहा है?
2- किस नियम, किस नीति और किस न्याय के तहत इतने बच्चों की मेहनत और उनकी इच्छा को अनदेखा किया जा रहा है? आख़िर में, हम यह दोहराते हैं बच्चों और युवाओं की आवाज़ दबेगी नहीं… चाहे आज मंच छीन लिया जाए, कल यह आवाज़ और ज़ोर से उठेगी। 2027 क़रीब हैं विधानसभा चुनाव, एक बार फिर जनता छोटे छोटे अंतरों से हरा कर बहुत दूर फेंकेगी। तैयार रहें




















