वर्धमान कॉलेज बिजनौर द्वारा आयोजित विकसित भारत 1947 पर
प्रोफेसर ललित तिवारी ने व्याख्यान दिया


नैनीताल। कुमाऊं विश्वविद्यालय के निदेशक विजिटिंग प्रोफेसर निदेशालय डॉ ललित तिवारी। ने वर्धमान कॉलेज बिजनौर द्वारा आयोजित विकसित भारत 2047 में आज विशेष आमंत्रित व्याख्यान दिया। डॉ तिवारी ने जलवायु परिवर्तन का जैव विविधता पर प्रभाव एवं 2047 विषय पर व्याख्यान दिया डॉ तिवारी कहा कि आजादी के 100 वर्ष पूर्ण होने पर भारत 2047 में विशिष्ट राष्ट्र बने इसके लिए हम सब को मिल कर कार्य करना होगा । जलवायु परिवर्तन का मिटिगेशन करना होगा जिसमें टेंपरेचर वृद्धि को सबसे पहले कम करना होगा । 2047 तक भारत 8 प्रतिशत जीडीपी के साथ 30 से 40 ट्रिलियन की आर्थिकी तक पहुंच जाएगा । जैव विविधता विश्व के 11 प्रतिशत आर्थिकी में हर वर्ष योगदान करते है तथा भारत 12 मेगा डायवर्सिटी देशों में शामिल है किन्तु जलवायु परिवर्तन वेजिटेरियन को नुकसान पहुंचा रहे है तथा। ये वर्तमान की सबसे बड़ी चुनौती है । डॉ तिवारी ने कहा कि कम कार्बन उत्सर्जन ,पलायन को रोकना जिससे शहरों का दबाव कम हो तथ्य सौर ऊर्जा ,पवन ऊर्जा का प्रयोग बढ़ाना होगा । भारत की 140 मिलियन हेक्टेयर भूमि को जंगल बनाने की जरूरत होगी । हर नागरिक की जिम्मेदारी है की हम पर्यावरण की जिम्मेदारी को पूर्ण करे । ग्रीन इकॉनमी को बढ़ावा देना तहां इकोसिस्टम इन्फोर्समेंट जरूरी होगा । 2047 पर्यावरण संरक्षण के लिए बहुत महत्व का भी है । इस अवसर पर prof तिवारी को प्रतीक चिन्ह भेट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर प्राचार्य डॉ मित्तल ,दे चारु दत्त , डॉ मुकेश ,डॉ अनामिका , सहित प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।




















