September 25, 2026
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ॐ नमः शिवाय शिव की आराधना का सबसे सरल मंत्र: प्रोफेसर ललित तिवारी

नैनीताल। ॐ नमः शिवाय शिव की आराधना का सबसे सरल मंत्र है जिसमें नमः शिवाय का अर्थ है “हे शुभ देव को प्रणाम! अर्थात “भगवान शिव की आराधना” इसे शिव पंचाक्षर या केवल पंचाक्षर कहा जाता है, जिसका अर्थ है “पांच अक्षरों वाला” मंत्र और यह महादेव को समर्पित है।माघ फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पर्व मनाया जाता है जो निराकार परमात्मा शिव जन्म- मरण से न्यारे अथवा अयोनि हैं। शिव का अन्य महापुरुष या देवता की तरह कोई लौकिक या शारीरिक जन्म नहीं होता जो कि उनका जन्मदिन मनाया जाये। कल्याणकारी विश्व पिता ‘शिव’ तो अलौकिक अथवा दिव्य-जन्म लेकर अवतरित होते हैं।
माना जाता है कि सृष्टि का प्रारम्भ इसी दिन से हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। इसी दिन भगवान शिव का विवाह देवी पार्वती के साथ हुआ था। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव व पत्नी पार्वती की पूजा होती हैं। वर्ष में होने वाली 12 शिवरात्रियों में से महाशिवरात्रि को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है| सुरक्षा एवं आरोग्यता के लिए महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् का जाप किया जाता है। शिवरात्रि का अर्थ है रात, वह समय है जो आपको विश्राम या शांति प्रदान करती है, जब सब कुछ शांत और स्थिर हो जाता है। शिवरात्रि केवल शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि मन और अहंकार के लिए भी विश्राम का समय है। जब मन, बुद्धि और अहंकार ईश्वर में विश्राम करते हैं, वही वास्तविक विश्राम है, और सबसे गहरा विश्राम – पूर्ण शांति है। शिवरात्रि पर पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध ऐसी स्थिति में होता है जिससे मनुष्य में ऊर्जा का स्वाभाविक प्रवाह होता है । यह वह दिन है जब प्रकृति व्यक्ति को उसकी आध्यात्मिक ऊँचाई की ओर धकेलती है। यही इसकी विशेषता है ।पंचभूत स्थलम संस्कृत: पंचभूत स्थलम्, रोमनकृत: पंचभूत स्थलम , शिव को समर्पित पांच मंदिरों को संदर्भित करता है, जिनमें से प्रत्येक प्रकृति के पांच प्रमुख तत्वों की अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करता है: पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, और ईथर । महाशिवरात्रि आंतरिक जागृति के बारे में है। ऊर्जा का विस्फोट तथा आध्यात्मिक ऊर्जाओं के लिए साधक इस ब्रह्मांडीय शक्ति को आत्मसात करने के लिए जागते है ।
पौराणिक मान्यता के अनुसार एक भील ने शिकार का इंतजार करते हुए एक बेल के पेड़ पर पूरी रात्रि बिताई. इस दौरान उसे कोई शिकार नहीं मिला लेकिन उसके शस्त्रों और शरीर से हिलने के कारण बेल के पत्र टूटकर नीचे शिवलिंग पर गिरे. जिसके कारण शिव का बिल्व पत्र से जाने-अनजाने में अभिषेक हुआ. मान्यता है कि वह रात्रि शिवरात्रि थी.यह भी कहा जाता है कि इसी रात शिव ने अपना तांडव नृत्य किया था, जो सृष्टि, पालन और संहार का ब्रह्मांडीय नृत्य है।महाशिवरात्रि इसलिए मनाई जाती है क्योंकि यह अहंकार के त्याग और चेतना जागरण का पर्व है। यह हमें सिखाती है कि शिव का अर्थ है शून्यता, स्थिरता और संतुलन जो आत्मिक विकास से जुड़ी हुई है। देवाधीदेव महादेव से सभी प्राणियों के लिए प्रार्थना है कि बुद्धि व एकाग्रता के साथ
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात् से अपनी कृपा बनाए रखें । बाबा भोलेनाथ की कृपा सबपर बनी रहे जीवन में शक्ति ,हृदय में शांति ,हर पथ में मंगल का संचार हो यही प्रार्थना हो ।

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