नियमित व सेवानिवृत कर्मचारियों ने पेंशन बंद करने के विरोध में
सीएम धामी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धरना प्रदर्शन करते हुए नारे बाजी की और दी चेतावनी

नैनीताल। सरोवर नगरी के प्रांतीय खंड प्रांगण में नियमित व सेवानिवृत कर्मचारियों ने सीएम धामी के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धरना प्रदर्शन करते हुए नारे बाजी की बता दें नैनीताल जिले के नियमित व सेवानिवृत कर्मचारी प्रांगण में एकत्र हुए इस दौरान सेवानिवृत्ति संगठन के पूर्व जिला अध्यक्ष गिरीश चंद्र जोशी के नेतृत्व में पेंशन बहाली की मांग को और धरना प्रदर्शन करते हुए नारेबाजी की इस दौरान श्री जोशी ने कहा अगर शासन द्वारा उनकी पेंशन बहाली नहीं की गई शासन द्वारा जो सर्वोच्च न्यायालय की अवाहना की जा रही है उसकी शरण ली जाएगी। इस दौरान पूर्व जिला अध्यक्ष गिरीश चंद्र जोशी ने कहा 16 जनवरी को शासन ने आदेश जारी कर सभी की पेंशन पर रोक लगा दी है। जबकि वर्ष 2018 में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नियमित व सभी सेवानिवृत कर्मचारियों की पेंशन बहाली के आदेश किया जा चुके हैं उन आदेशों का भी पालन नहीं किया जा रहा है। अगर सरकार द्वारा अपने आदेशों को तुरंत वापस नहीं लिया गया तो हमें उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय की शरण में जाना पड़ेगा। और आगामी विधानसभा चुनाव में धामी सरकार को वापस जाना होगा क्योंकि हम उनको बाहर का रास्ता दिखाएंगे। बता दे शासन ने 16 जनवरी 2026 को जारी शासनादेश में एक अक्तूबर 2005 के बाद नियमित हुए वर्कचार्ज कार्मिकों की दस वर्ष की सेवा पूर्ण होने पर ही पेंशन की परिधि में रखा गया है। और उससे पूर्व के कर्मचारियों को पेंशन का लाभ नहीं दिया जा रहा है और इस माह से उनकी पेंशन पर रोक लगा दी है। इस आदेश का विरोध करते हुए कर्मचारी आंदोलन में जुट गए हैं। और उन्होंने प्रांतीय खंड कार्यालय से कलेक्ट डीएम कार्यालय तक जुलूस निकाल कर परगना मजिस्ट्रेट नवाजिश खलिक के माध्यम से मुख्यमंत्री धामी को ज्ञापन भेजा। और चेतावनी दी अगर जल्दी ही कर्मचारियों को पेंशन नहीं दी गई तो हम उच्च न्यायालय की शरण में जाने को बाध्य होंगे। इस मौके पर गिरीश चंद्र जोशी,गोधन सिंह नेगी, भैरव दत्त, दीवान सिंह बिष्ट, आनंद सिंह, पूरन सिंह अनेरिया, कुंदन सिंह, ठाकुर सिंह, तुलसी देवी, हेमा देवी, कमला देवी, देवकी देवी, तारा देवी, कैलाश सिंह,नारायण सिंह, डिगर सिंह,नंदन राम, राजेंद्र सिंह, धन सिंह लटवाल, सहित दर्जनों कर्मचारी मौजूद थे।




















