अंतरिक्ष की और युवाओं के बढ़ते कदम
अंतरिक्ष मंथन का महासंग्राम
एस्ट्रोवर्स–नासा स्पेस ऐप्स चैलेंज 2025
भीमताल में हुआ दुनिया का सबसे बड़ा स्पेस इनोवेशन इवेंट













भीमताल नैनीताल। भीमताल की खूबसूरत वादियों में हुआ जबरदस्त “अंतरिक्ष मंथन” हुआ जिसमें 300 से ज़्यादा छात्रों ने नासा की चुनौतियों को अपने इनोवेटिव आइडियाज से हल करने का प्रयास किया।
यह तीन दिवसीय आयोजन एस्ट्रोवर्स एक्सपीरियंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा नासा के सहयोग से आयोजित किया गया बता दें अंतरिक्ष को लेकर यह प्रतियोगिता प्रतिष्ठित ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी भीमताल में आयोजित की गई। जिसमें छात्र-छात्राओं को बताया गया
एस्ट्रोवर्स और एस्ट्रोपाठशाला क्या है?
एस्ट्रोवर्स भारत की अग्रणी संस्था है जो स्पेस एजुकेशन और एस्ट्रो टूरिज्म को आम लोगों तक पहुँचाने के लिए कार्यरत है।
इसकी शिक्षा इकाई एस्ट्रोपाठशाला अब तक 35,000+ छात्रों को खगोल विज्ञान और विज्ञान के प्रयोगात्मक अध्ययन से जोड़ चुकी है।
यह “लर्निंग बाई डूइंग ” यानी करके सीखो की शिक्षा पद्धति पर आधारित है।
कार्यक्रम की मुख्य झलकियाँ
पहला दिन (4 अक्टूबर): लॉन्च डे और मिनी सैटेलाइट चैलेंज
उद्घाटन समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि एरीज के रजिस्ट्रार मोहित कुमार जोशी, विशिष्ट अतिथि प्रो. भुवन भट्ट द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया
इसके बाद शुरू हुआ रोमांचक “पिसोस्त चैलेंज ” बच्चों का अपना छोटा स्पेस मिशन
पिसोस्त चैलेंज (मिनी सैटेलाइट चैलेंज) मैं छात्र-छात्राओं ने खुद अपने हाइड्रो राकेट्स तैयार किए और लॉन्च किए। उन्होंने सैटेलाइट से तापमान, दबाव और वीडियो डेटा रिकॉर्ड किया।
पैराशूट की मदद से रॉकेट और सैटेलाइट दोनों की सुरक्षित लैंडिंग करवाई गई।
यह बच्चों के लिए एक असली “मिनी स्पेस साइंटिस्ट ” जैसा अनुभव था।
रात में छात्रों ने तारों का नज़ारा किया — एक यादगार स्टार गजिंग सेशन में दूसरा दिन (5 अक्टूबर): स्कूली छात्रों की सुपर स्पेस बैटल
यह दिन पूरी तरह स्कूल छात्रों के नाम रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि डायरेक्टर एरीज डॉ. मनीष नाजा और विशिष्ट अतिथि प्रो. भुवन भट्ट की उपस्थिति से हुई।
इस दिन चार मज़ेदार और ज्ञानवर्धक प्रतियोगिताएँ आयोजित की गईं
हाइड्रो-रॉकेट्री
छात्रों ने खुद के डिज़ाइन किए रॉकेट बनाकर लॉन्च किए — जिसने सबका दिल जीत लिया।
विजेता स्कूल:
प्रथम: डी.पी.एस. (DPS), हल्द्वानी, द्वितीय: गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल, तृतीय: इंस्पिरेशन स्कूल, हल्द्वानी
टेलीस्कोप एमिंग
यह प्रतियोगिता गति और सटीकता की परीक्षा थी — छात्रों को टेलीस्कोप को निर्धारित तारे या ग्रह पर सबसे तेज़ फोकस करना था।
विजेता स्कूल:
प्रथम: इंस्पिरेशन स्कूल, हल्द्वानी, द्वितीय: दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल, हल्द्वानी, तृतीय: डी.पी.एस., हल्द्वानी
रोबो-कबड्डी
यह पारंपरिक कबड्डी नहीं थी यह थी रोबोट्स की हाई-टेक लड़ाई
एक टीम अटैक करती और दूसरी डिफेंड करती। 60 सेकंड में क्यूबस कैप्चर करने का रोमांच सबके बीच छा गया।
विजेता स्कूल:
प्रथम: साई पब्लिक स्कूल, काशीपुर, द्वितीय: गुरुकुल फाउंडेशन स्कूल, तृतीय: इंस्पिरेशन स्कूल, हल्द्वानी
- पिकोसैट चैलेंज
छात्रों ने अपने बनाए मिनी सैटेलाइट्स के लॉन्च डेटा और प्रदर्शन को प्रस्तुत किया — जिसने सबका दिल जीत लिया।
विजेता स्कूल:
प्रथम: दीक्षांत इंटरनेशनल स्कूल, हल्द्वानी, द्वितीय: इंस्पिरेशन स्कूल, हल्द्वानी,तृतीय: सेंट जोसेफ कॉलेज, नैनीताल
पुरस्कार वितरण समारोह
कार्यक्रम के समापन समारोह में ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर कर्नल एक के नय्यर ने विजेता टीमों को सम्मानित किया।
बच्चों में गजब का उत्साह देखने को मिला — हर टीम ने अपने मॉडल और विचारों पर गर्व जताया।
एस्ट्रोवर्स लीडरशिप की प्रेरणादायक उपस्थिति
इस पूरे आयोजन में एस्ट्रोवर्स की कोर लीडरशिप टीम — अजय रावत (को फाउंडर एन्ड को ),शुभम कुमार (को फाउंडर एन्ड को ) राहुल पंथरी (को फाउंडर एन्ड को )
• रूपन थापा ( सी टी ओ)
की मौजूदगी ने छात्रों को दिशा और प्रेरणा दोनों दी।
इन सभी ने प्रतिभागियों को “विज्ञान को मज़ेदार और प्रयोगात्मक रूप से सीखने” का मार्ग दिखाया।
तीसरा दिन (6 अक्टूबर): नासा मेन हैकाथॉन – कॉलेज इनोवेटर्स का मुकाबला
अंतिम दिन कॉलेज के छात्रों ने नासा द्वारा दी गई चुनौतियों पर अपने प्रोजेक्ट्स प्रस्तुत किए —
विषय थे जलवायु परिवर्तन, पृथ्वी निगरानी और अंतरिक्ष डेटा एनालिसिस।
मुख्य हैकाथॉन के परिणाम:
प्रथम स्थान: मलोट इंस्टिट्यूट, पंजाब, द्वितीय स्थान: BIAS, भीमताल, और तृतीय स्थान: जिट, जोधपुर
समापन संदेश
तीन दिनों तक चला यह आयोजन सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं था यह था भारत के युवा वैज्ञानिकों का महाउत्सव
एस्ट्रोवर्स और एस्ट्रोपाठशाला ने यह साबित किया कि भारत के बच्चे भी अंतरिक्ष विज्ञान की चुनौतियों से डटकर मुकाबला कर सकते हैं।
भीमताल की वादियों से उठी यह नई सोच अब भारत को अंतरिक्ष के वैश्विक मंच पर एक नई पहचान दे रही है।




















