कर्मचारियों ने कुलपति प्रो. लोहनी को कार्यभार ग्रहण करने पर दी बधाई

नैनीताल। सरोवर नगरी के समीपवर्ती कुमाऊँ विश्वविद्यालय की रामगढ़ स्थित महादेवी वर्मा सृजन पीठ की कार्यकारिणी के सदस्य और चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के हिंदी एवं आधुनिक भारतीय भाषा विभाग के अध्यक्ष प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी द्वारा उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के कुलपति का कार्यभार ग्रहण किए जाने पर महादेवी सृजन पीठ के निदेशक एवं डीएसबी परिसर, नैनीताल के हिंदी विभागाध्यक्ष प्रो. शिरीष कुमार मौर्य और पीठ समन्वयक मोहन सिंह रावत ने प्रसन्नता व्यक्त की है तथा उन्हें अपनी बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
प्रो. मौर्य ने विश्वास व्यक्त किया कि प्रो. लोहनी के दिशा-निर्देशन में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय प्रगति के पथ पर निरंतर अग्रसर तथा चहुंमुखी विकास करेगा। पीठ समन्वयक मोहन सिंह रावत ने कहा कि देश-विदेश में हिंदी के संवर्धन और संरक्षण में प्रो. लोहनी का महत्वपूर्ण योगदान है। साथ ही मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा के क्षेत्र में कार्य करने का उनका व्यापक अनुभव है, जिसका लाभ उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय को मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि नवनियुक्त कुलपति प्रो. नवीन चन्द्र लोहनी मूलतः उत्तराखण्ड के जनपद बागेश्वर से हैं। पूर्व में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में अधिष्ठाता कला संकाय, निदेशक मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा निदेशालय, समन्वयक आईक्यूएसी, कुलसचिव पदों पर कार्य कर चुके हैं। अनेक महत्वपूर्ण शिक्षण, सांस्कृतिक, साहित्यिक संस्थाओं के साथ आपने कार्य किया है तथा हाल ही में आपको अभ्युदय अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ शिक्षक पुरस्कार, अंतरराष्ट्रीय प्रेमचंद आलोचना सम्मान तथा उत्तर प्रदेश भाषा संस्थान द्वारा शब्द शिल्पी सम्मान से अलंकृत किया गया है।
भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद द्वारा शंघाई अंतरराष्ट्रीय अध्ययन विश्वविद्यालय (एस.आई.एस.यू.) चीन में आईसीसीआर चेयर और स्विट्जरलैंड के लौजान विश्वविद्यालय में गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर चेयर पर विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर कार्य कर चुके हैं। चीन में “हिंदी इन चाईना” नामक समूह बनाकर और चीन में पहली हिंदी पत्रिका “समन्वय हिंची” के प्रकाशन का कार्य किया, जो चीन और भारत ही नहीं वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हुईं।
प्रो. लोहनी सिसु द्वारा प्रकाशित हिंदी-चीनी-अंग्रेजी शब्दकोश संपादन मंडल के सदस्य हैं। चीन तथा स्विट्जरलैंड में उन्होंने भारतीय शिक्षा, संस्कृति और भाषा प्रचार का कार्य किया है। प्रो. लोहनी के निर्देशन में 26 विद्यार्थियों ने पीएच.डी. उपाधि प्राप्त की है तथा 99 से अधिक विद्यार्थी एम. फिल. की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं।
वे विदेश मंत्रालय द्वारा आयोजित विश्व हिंदी सम्मेलनों में न्यूयॉर्क, जोहान्सवर्ग, भोपाल, मारीशस और फिजी में प्रतिभागी रहे हैं तथा आपने ब्रिटेन, स्विट्ज़रलैंड, हंगरी, स्पेन, अमेरिका, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित विश्व के अनेक देशों में आयोजित संगोष्ठी, कार्यशालाओं आदि में प्रतिभाग किया है। बेल्जियम, फ्रांस, ऑस्ट्रिया, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, मलेशिया, इंडोनेशिया सहित कई देशों की यात्राएं भी कर चुके हैं।
प्रो. लोहनी सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय के साहित्य के आधिकारिक वक्ता हैं। रेडियो, टेलीविज़न और मुद्रित सोशल मीडिया,जनसंचार माध्यमों में भी लंबे समय से सक्रिय हैं। उन्होंने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ में वर्ष 2008-09 से कौरवी लोक साहित्य तथा वर्ष 2009-10 से प्रवासी साहित्य पाठ्यक्रम के रूप में प्रारंभ किया।
वे अन्तरराष्ट्रीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए निरंतर सक्रिय रहे हैं।
उनके 80 से अधिक शोध पत्र तथा 12 पुस्तकें प्रकाशित हैं। व्यंग्य, कहानी लेखन एवं समीक्षात्मक लेखन में महत्वपूर्ण कार्य है। वह राजभाषा समिति, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार (वर्ष 2014 से 2019) तथा वर्तमान में उत्तराखण्ड भाषा संस्थान के नामित सदस्य हैं।




















