‘एरोसोल मॉडलिंग’ पर एरीज इस्ता स्कूल का आयोजन



नैनीताल। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान अनुसंधान संस्थान (एरीज) 6-10 अप्रैल, 2026 के दौरान ‘एरोसोल मॉडलिंग’ पर एरीज इस्ता स्कूल का आयोजन कर रहा है। इस स्कूल का उद्देश्य छात्रों और शोधकर्ताओं को एरोसोल के अध्ययन में उपयोगी सिमुलेशन और मॉडलिंग तकनीकों की मूल अवधारणाओं से परिचित कराना है। एरोसोल वायुमंडल में निलंबित छोटे छोटे ठोस कण या तरल बूंदें होती हैं, जैसे कि धुआँ, कोहरा, धूल आदि।
उद्घाटन सत्र के दौरान, एरोसोल के अध्ययन में हिमालय में स्थित एरीज के स्थान की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए निदेशक डॉ. मनीष कुमार नजा ने संस्थान में चल रहे अनुसंधान और प्रेक्षण सुविधाओं का विवरण दिया। भारत में एरोसोल निगरानी के प्रणेता और इस क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञ प्रो. वाई. एस. मय्या ने भारत में एरोसोल विज्ञान के इतिहास पर प्रकाश डाला और AI के जमाने में भी गणना की बारीकियों से स्वतः अवगत होने के महत्व पर जोर दिया। भारतीय एयरोसोल विज्ञान और प्रौद्योगिकी संघ (IASTA) के सचिव डॉ. मनीष जोशी ने IASTA की गतिविधियों का ब्यौरा देते हुए यह समझाया की एरोसोल किस प्रकार हमारे जीवन से जुड़े हुए हैं। स्कूल के संयोजक डॉ. उमेश सी. दुमका ने स्कूल में आयोजित होने वाले विभिन्न सत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस स्कूल में एरोसोल से संबंधित विभिन्न विषयों को शामिल किया गया है, जैसे कि वायुमंडलीय प्रक्रियाएँ, वायुमंडलीय एरोसोल मॉडलिंग के मूल सिद्धांत, रिमोट सेंसिंग तकनीकें, रासायनिक परिवहन मॉडल और जलवायु सिमुलेशन। एरीज तथा अन्य संस्थानों के विशेषज्ञ प्रतिभागियों को व्याख्यान देने के साथ-साथ व्यावहारिक प्रदर्शन भी प्रदान करेंगे। देश भर के विभिन्न संस्थानों और विश्वविद्यालयों से 38 छात्र और शोधकर्ता इस स्कूल में भाग ले रहे हैं।




















