इनोवेशन इंक्यूबशन सेंटर, कुमाऊं यूनिवर्सिटी द्वारा छात्रों को कराया गया
बायो-फ्लॉक फिश टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सेंटर का भ्रमण किया


नैनीताल। सरोवर नगरी इनोवेशन इंक्यूबशन सेंटर, कुमाऊं यूनिवर्सिटी नैनीताल द्वारा छात्रों बायो-फ्लॉक फिश टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सेंटर, जन्तु विज्ञान विभाग, डी.एस.बी. परिसर, नैनीताल का भ्रमण कराया गया। बता दे इस दौरान कार्यक्रम में प्रोफेसर आशीष, तिवारी, निदेशक इनोवेशन इंक्यूबशन सेंटर, कुमाऊं यूनिवर्सिटी द्वारा सभी छात्रों को
फील्ड एक्सपोज़र के बारे जानकारी दी।
बायो-फ्लॉक फिश टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सेंटर, के प्रभारी प्रोफेसर हरीश चंद्र सिंह बिष्ट द्वारा बताया बायो-फ्लॉक सेंटर एक आधुनिक विधि है जिसमे छोटे टैंक और कम पानी की जगह पर मछलियों का अधिक मात्रा मे उत्पादन किया जा सकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथी डॉ सुरेश चंद्रा, वरिष्ठ वैज्ञानिक, डायरेक्टरेट कोल्ड वाटर फिशरिसेस भीमताल द्वारा बताया गया की भारत विश्वव मे मतस्य उत्पादन मे दूसरे नंबर पर है और विश्व का लगभग 8% मतस्य उत्पादन करता है । डॉ चंद्रा के द्वारा यह भी बताया गया की ट्रॉउट, स्नो ट्रॉउट और महासीर जैसी प्रजातियां अच्छा उत्पादन करती है। उनके द्वारा यह भी बताया गया की प्रधानमंत्री मतस्य सम्पदा योजना के अंतर्गत आर्थिक सहायता प्राप्त कर मतस्य पालन किया जा सकता है
और साथ ही मतस्य पालन को रोजगार के साधन के रूप मे बढ़ाया जा सकता है।
जन्तु विज्ञान विभाग के डॉ संदीप दत्त मेंडोली, डॉ उजमा सिद्धकी, डॉ सीता देवाली और डॉ दीपक मेलकोनी द्वारा छात्रों को बायो फ्लॉक फिश टैंक दिखाए गए, मछलीयों के भोजन और मतस्य पालन से सम्बंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी।
कार्यक्रम में प्रोफेसर आशीष तिवारी, प्रोफेसर ललित तिवारी विभागाध्यक्ष वनस्पति विज्ञान विभाग, प्रोफेसर दीपिका गोस्वामी, प्रोफेसर हरीप्रिया पाठक, प्रोफेसर लज्जा भट्ट, प्रोफेसर रीना सिंह, प्रोफेसर मनोज कुमार, डॉ हिमांशु लोहमी, डॉ मुकेश सामंत, डॉ दीपक कुमार, डॉ श्रुति साह, डॉ नीता आर्या, डॉ दिव्या पांगती, डॉ नेत्रपाल शर्मा, डॉ मैत्री नारायण, डॉ नंदन, डॉ नवीन, डॉ ईरा तिवारी, डॉ इकरम जीत सहित 60 छात्रों ने प्रतिभाग किया।
कार्यक्रम के अंत मे प्रोफेसर हरीश चंद्र सिंह बिष्ट द्वारा बायो-फ्लॉक फिश टेक्नोलॉजी ट्रांसफर सेंटर का भ्रमण करने हेतु सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।




















