उत्तराखंड का विशेष पर्व फूलदेई
नैनीताल में धूमधाम से मनाया गया
बच्चों को बहुत भाता है पर्व,वर्षभर रहता है इंतजार

नैनीताल। सरोवर नगरी में देवभूमि उत्तराखंड का प्रसिद्ध लोक पर्व फूलदेई रविवार को पूरे उत्साह और परंपरागत रीति रिवाजों के साथ मनाया गया।
बता दें इस अवसर पर बच्चे फूलों से सजी थाल घर-घर जाते हैं और देहरी पर फूल व चावल बिखेरते हुए पारंपरिक लोकगीत फूल देई छममा देई, दैणी द्वार भर भकार गाकर घर की सुख.समृद्धि की कामना करते हैं। यह त्योहार मुखय रूप से बच्चों द्वारा मनाया जाता हैए इसलिए इसे लोक बाल पर्व भी कहा जाता हैं। फूलदेई के एक दिन पहले ही बच्चे जंगलों और बाग बगीचों से प्योली, बुरांश, बासिंग, आड़ू व खुबानी और मेहल जैसे रंग.बिरंगे फूल तोडक़र लाते है और रंग बिरंगी फूलों से थाली व टोकरी को सजाते हैं, गीत गाने के बदले में लोग बच्चों को दाल, चावल, गुड़ व घी और दक्षिणा देते हैं,
पर्व को लेकर लीला साह ने बताया बसंत रितु के आगमन में फूलदेई त्यौहार मनाया जाता है,कहाकि बच्चें पहले दिन फूल तोडक़र लाते हैं और अपनी टोकरी को सजाते है, लेकिन समय के साथ बच्चों में अपने त्यौहारों का उत्साह कम होते जा रहा हैं अपनी परम्परा को आगे बढ़ाना चाहिए जबकि स्वेता साह ने बताया बच्चों के लिए यह त्यौहार काफी खास होता है, बच्चों में उत्साह कम देखने को मिल रहा है, फूलदेई बच्चों का त्यौहार है बच्चें देहरी में फूल व चावल डालते हैं और फूल देई छमा देई का गीत गाते है जिसके बदले में बच्चों को उपहार दिया जाता है घर की सुख समृद्धि की कामना करते हैं। निशा भाटिया साह ने बताया छोटे बच्चों द्वारा फूल चावल की थाली सजाई गई है पहले से बच्चें दूसरे के घर पर भी फूल डालने जाते थे लेकिन अब बच्चों में उत्साह कम हो रहा है, फूल देई छममा देई भरी भकार कहकर घर की सुख समृद्धि की जाती है जिसके बाद बच्चों को गुड़ चावल व कुछ पैसे दिए जाते हैए आने वाली पीढ़ी को अपने संस्कृति के बारे में जानना चाहिए।




















