राजनीति विज्ञान विभाग मे
एशिया के लिए तिब्बती पठार और उसकी नदियों का
वैश्विक महत्व विषय पर अतिथि व्याख्यान एवं संवाद हुआ आयोजित

नैनीताल। सरोवर नगरी में राजनीति विज्ञान विभाग, कुमाऊँ विश्वविद्यालय द्वारा “एशिया के लिए तिब्बती पठार और उसकी नदियों का वैश्विक महत्व” विषय पर एक विशेष अतिथि व्याख्यान एवं संवाद सत्र का आयोजन 108 पीस इंस्टिट्यूट के सहयोग से किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों और शोधार्थियों के बीच तिब्बत पठार के पारिस्थितिक तथा भू-राजनीतिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत राजनीति विज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रोफेसर कल्पना अग्रहरि द्वारा अतिथि वक्ता Tempa Gyaltsten Zamlha के स्वागत से हुई।
अपने व्याख्यान में श्री टेम्पा ने तिब्बती पठार की वैश्विक पारिस्थितिक भूमिका और उसके महत्व को विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र को अक्सर “थर्ड पोल” कहा जाता है क्योंकि यहाँ विशाल मात्रा में हिमनद और मीठे पानी के स्रोत मौजूद हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एशिया की कई प्रमुख नदियाँ इसी पठार से निकलती हैं और वे महाद्वीप के करोड़ों लोगों की आजीविका और जल आवश्यकताओं को पूरा करती हैं।
व्याख्यान के दौरान उन्होंने तिब्बती पठार के सामने मौजूद गंभीर चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन, संसाधनों के विनाशकारी दोहन तथा नदियों पर अत्यधिक बांध निर्माण को इस क्षेत्र के लिए प्रमुख खतरे बताया। उनके अनुसार, ये गतिविधियाँ पारिस्थितिक असंतुलन उत्पन्न कर रही हैं और भविष्य में एशिया की जल सुरक्षा तथा पर्यावरणीय स्थिरता पर गंभीर प्रभाव डाल सकती हैं।
अपने व्याख्यान के अंत में श्री टेम्पा ने तिब्बती पठार की नाजुक पारिस्थितिकी की रक्षा के लिए सतत पर्यावरणीय नीतियों, संसाधनों के जिम्मेदार प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया। इस ऑनलाइन व्याख्यान में प्रोफेसर नीता बोरा, प्रोफेसर मधुरेंद्र कुमार, डॉ. हरदेश कुमार, डॉ. भूमिका प्रसाद, डॉ. रुचि मित्तल, डॉ. पंकज सिंह और डॉ. मोहित रौतेला सहित विभाग के शोधार्थी और छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन एक सार्थक संवाद सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने विषय से संबंधित वक्ता से प्रश्न पूछे।




















